Hindi Shayari, Shayad Ab Dushman

Hindi Shayari, Shayad Ab Dushman…

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शायद अब दुश्मन भी मुरीद हैं हमारे,
जो वक़्त-बेवक़्त हमारी ही चर्चा किया करते हैं,
छुपा के खंजर बगल में हमारी गली से गुज़रते हैं,
और मिलने पर सलाम-नमस्ते किया करते हैं।