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कब से सता रहा है कोई मेहरबाँ मुझको

कब से सता रहा है कोई मेहरबाँ मुझको…

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ये रास आये भला किस तरह जहाॅ मुझको,
कब से सता रहा है कोई मेहरबाँ मुझको।
ना जाने क्या मेरी नज़रों में हो गया ऐ दोस्त,
बहार में भी नज़र आती है अब खिज़ा मुुझको।
बहाता ना आंसू उसकी तलाश में हरगिज़,
नज़र जो आता दूर से ही आशियाँ मुझको।
तू गम ज़दा न हो खुशियों से झूम जा ऐ दिल,
दिखाई देते है मंजिल के अब निशा मुझको।
दुआ मांगू यही मैं अब हर मर्तबा तुझसे,
नज़रों में किसी के भी ना गिरा मुझको।

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हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें

हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें…

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हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें,
मेरा नसीब जगा दो तो ईद हो जायें ।
नहीं है कोई जरूरत शराबो साकी की,
नज़र से अपनी पिला दो तो ईद हो जायें।

तमाम उम्र तो किसमत किस्मत ने दिये रंजो अलम,
खुशी का नगमा सुना दो तो ईद हो जाये।
हमें तो गम के अन्धेरों ने आ के घेरा है,
तुम एक दीप जला दो तो ईद हो जायें।

तुम्हारे दीदार में छुपी है खुशियाँ मेरी,
तुम जो नकाब उठा दो तो ईद हो जायें।
लिये दीदार की हसरत वो बैठा है ‘असद’
तुम जो चिलमन हटा दो तो ईद हो जायें।

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Hindi Ghazal, ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में

Hindi Ghazal, ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में…

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ना मुझे है खबर न मुझे है पता,
ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में।
मैं किस से कहूँ मैं कितना थका,
सभी अजनबी है तेरे शहर में।।

इस दिल को देखो कितना पागल है ये,
ज़ख्म कितने हुए है कितना घायल है ये।
फिर भी अनजान राहों में चलते हुए,
ये तुझको पुकारे तेरे शहर में।।

तू मेरे दिल की आवाज़ सुन ले ज़रा,
इस दिल में ये कैसा दर्द है भरा ।
मैं मुसाफिर हूँ मेरी मंज़िल है तू,
मुसाफिर-खाना नही है तेरे शहर में।।

दिल की फरियाद सुन ले ए जाने वफा,
अब तो आजा सामने तू कहाँ है छिपा ।
ये दिल हमारा है कितना उदास,
मैं कितना परेशां हूँ तेरे शहर में।।

मैं किस से बताऊँ कहाँ जा रहा हूँ,
इस दिल से तेरा नाम लिये जा रहा हूँ।
लोग हँसते है पैरों के ज़ख्म देख कर,
कोई हमदर्द नहीं है तेरे शहर में।।

मेरी हालत थी कैसी अब कैसी हुई है,
मुझसे जुदा है दिल तू सोयी हुई है।
जहा से गुजरता हूँ तेरी तलाश में,
लोग पागल समझते है तेरे शहर में।।

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रात कट जायें

रात कट जायें…

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हमारे पास जो आओ तो रात कट जायें,
वफा के गीत सुनाओ तो रात कट जायें।
हमें तो गम के अंधेरो ने आ कर घेरा है,
तुम आ के शमा जलाओं तो रात कट जायें।
तुम्हे अपना बनाऊ दिल में बसाऊ ये हसरते दिल की,
हमें गले से लगाओ तो रात कट जायें।
हमारे लिये शराबख़ाने की कैद नहीं,
अगर नज़र से पिलाओ तो रात कट जायें।
इशारे होते है रोज़ दूर से ही ‘असद’
करीब आ के ना जाओ तो रात कट जायें।

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