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#1
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रोने से और इश्क में बेबाक हो गये धोये गये हम ऐसे कि बस पाक हो गये सर्फ़-ए-बह-ए-मै हुए आलात-ए-मैकशी थे; ये ही दो हिसाब,सो यों पाक हो गये रुस्वा-ए-दहर गो हुए आवार्गी से तुम बारे तबीयतों के तो चालाक हो गये कह्ता है कौन नाल-ए-बुल्बुल को बेअसर पर्दे में गुल के लाख जिगर चाक हो गये पूछे है क्या वुजूद-ओ-अदम 'एह्ल-ए-शौक का आप अप'ने आग से खःआस-ओ-खःआशाक हो गये कर'ने गये थे; उस से तघःआफ़ुल के हम गिला की एक ही निगाह कि बस खःआक हो गये इस ढगं से उठायी कल उस'ने 'आसद' कि लाश दुश्मन भी जिस को देख के घम्नाक हो गये |
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