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#1
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ये न थी हमारी किस्मत, कि विसाल-ए-यार होता, अगर और जीते रह्ते तो यहि इन्तेज़ार होता, तेरे वादे पे जियें हम, तो ये जान झूठ लेना, खुशि से मर न जाते अगर ऐतेबार होता कहुँ किस से, मैं के क्या है, शब-ए-गम बूरी बला है, मुझे क्या बूरा था मर'ना, अगर एक बार होता |
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