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#1
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कल सुबह के दामन में तुम होंगे ना हम होंगे, बस रेत के सीने पर कुछ नख़्शे कदम होंगे ! बस रात भर के मेहमान हम है, जुल्फ़ों के शब के थोडे से कम है! |
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