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#1
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तेरे आने कि आहट सुनि थि मैने और फिर तुम'से हुई क्या बात, कुछ याद नहीं तुम'से मिल'कर जो मैने कुछ गीत लिखे थे कैसे थे वो नग्में, कुछ याद नहीं पिछ्ली बारिश मैं झूम के बर'सा था सावन अब के कैसे गुज'री है बर'सात, कुछ याद नहीं कुछ खोये से थे तुम, कुछ खोये से थे हम कैसे गुज'रे वो लम्हें, कुछ याद नहीं बेखुदि बधं सि गयी जब प्यार हुआ तुम'से कित'ने मासूम थे वो जज'बात, कुछ याद नहीं तुम'ने फूलों कि महक दि या काटों कि चुभन क्या तुम'ने दिया सौगात, कुछ याद नहीं तुम मिले कब और कब जुदा हो गये कहाँ तुम'से हुई थि मुलाकात, कुछ याद नहीं |
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