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#1
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गुज़'रे हुए लम्हों का, ज़ख्म है दिल पर बिछ्डी हुइ यादॊं का, असर है हम पर किसी की याद में रोना, मुस्तक'बिल है अप'नी घुट घुट कर जीना भी, तक'दीर है अप'नी ये बद्नसीबी है मेहर'बान हम पर गुज़'रे हुए लम्हों का, ज़ख्म है दिल पर रातों को जग'ना फ़ित'रत है अप'नी दर्द-ए-दिल को सीना भी किस्मत है अप'नी बेवफ़ा होने का इल्ज़ाम है हम पर गुज़'रे हुए लम्हों का ज़ख्म है दिल पर |
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| जब कोई ख्याल दिल से टकराता है ......... | itz me | Romantic Shayari | 0 | 11-25-2007 10:55 AM |