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#1
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मेरे मेह्बूब तेरे रुक'सार के दिदार से मुझ'को मह'रुम न कर ये दुनिया बढि ज़ालिम है कम से कम तु ज़ुल्म न कर तेरी बेरुखि दर्द बढाती है मैन हर'पल शर्मिन्दा हुँ बहुत मुझ'को तु और रुस'वा न कर |
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