रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये

रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये…

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रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये,
खुद को अन्धेरे में छुपा कर चले गये।

न जान सके उस बेवफा की फितरत को,
वो ढेरों ख्वाब मुझको दिखा कर चले गये।

खुद से भी ज्यादा यकीन था जिस पर,
वो मेरी जिन्दगी में अंधेरे सजा कर चले गये।

हम तो कब के टूट कर बिखर गये होते,
वो इंसान को पत्थर बना कर चले गये।

जिनके लिए बचायी थी दिल में थोड़ी सी जगह,
वो नफरतों के तीर दिल में चला कर चले गये।

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हर लम्हा हर पल तुम्हे याद किया करते है

हर लम्हा हर पल तुम्हे याद किया करते है…

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अपनी जिन्दगी को यू ही आबाद किया करते है,
हर लम्हा हर पल तुम्हे याद किया करते है।

मेरे हाथों में बन जाये तेरी भी लकीर,
उसकी चैखट पे जाकर फरियाद किया करते है।

सुना है कि परिन्दे भी खबर ले कर आते है,
इसलिए हर परिन्दे को आजाद किया करते है।

मुहब्बत होती है क्या शायद वो जानते ही नहीं,
वो समझते है हम वक्त बरबाद किया करते है।

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Hindi Ghazal, आ कर न जाते परेशानी न होती

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मेरी जिन्दगी यू बेमानी न होती,
आ कर न जाते परेशानी न होती।

न हम प्यार करते न दिल में बसाते,
ऐसे वीरान मेरी जिन्दगानी न होती।

मेरी ख्वाहिशें यू ही न दम तोड़ देती,
दिल की दिल में रहती जुबानी न होती।

न हम दिल लगाते न लोग जान पाते,
जग में मशहूर अपनी कहानी न होती।

सबकुछ न देते कुछ बचा के भी रखते,
इतनी तन्हा कभी ये जवानी न होती।

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उनके शहर में कोई भी हमारा न था

उनके शहर में कोई भी हमारा न था…

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उनके शहर में कोई भी हमारा न था,
सभी अजनबी थे कोई सहारा न था।

तमन्ना थी कुछ करने की कुछ कर गये होते,
अपनी किसमत का बुलन्द सितारा न था।

चोट पे चोट देते रहे लोग मुझे,
किसी ने अपना कह कर पुकारा न था।

आ कर खो गये हम भीड़ के समन्दर में,
साहिल तो बहुत थे पर किनारा न था।

ढूँढता रहा अपनी मंज़िलों को ‘असद’
हमें किसी ने मंज़िलों पे उतारा न था।

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एक नज़र में ही हमारा काम कर गये

एक नज़र में ही हमारा काम कर गये…

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एक नज़र में ही हमारा काम कर गये,
दे कर अपना दिल हमारे नाम कर गये।

हम खोये रहे तेरे मसब्बुर में इस कदर,
कब सुबह हुई कब शाम कर गये।

हम छुपाते रहे अपने राजे मुहब्बत को,
वो मेरी मोहब्बत को आम कर गये।

आते न पास वो तो हम कब के मर गये होते,
मेरी जिन्दगी पे वो एहसान कर गये।

जिनके लिए हम तड़पते रहे रात-दिन,
वो मेहमान बन के दिल में आराम कर गये।

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मेरी किस्मत मुझे ले कर जायेगी कहाँ

मेरी किस्मत मुझे ले कर जायेगी कहाँ…

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मेरी किस्मत मुझे ले कर जायेगी कहाँ, हर वक्त मैं यही सोचता रहा।

ऐसे ही कट जायेगी जिन्दगी यहाँ-वहाँ, हर वक्त मैं यही सोचता रहा।

न हमदर्दी दिलों में न बची इंसानियत, कैसे है लोग यहाँ पर,
कैसा है ये जहां, हर वक्त मैं यही सोचता रहा।

कही तो होगी कभी तो मिलेगी, मै ढूँढता रहा,
न मुझे मंजिल मिली न मंजिल के निशां, हर वक्त मैं यही सोचता रहा।

वो बचपन जवानी में खुशियों की बारिश,
मेरी वो जिन्दगी अब मिलेगी कहा हर वक्त मैं यही सोचता रहा।।

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