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मुझको करीब आकर यूँ देखा न कीजिए

मुझको करीब आकर यूँ देखा न कीजिए…

Copy Ghazal

मुझको करीब आकर यूँ देखा न कीजिए,
ऐसा न कीजिए अभी ऐसा न कीजिए।

मैं मर रहा हूँ और ज़रा उनको देखना,
कहते है हुस्न को अभी तन्हा न कीजिए।

उनकी समझ में आया न, सौ बार कह चुका,
गैरों के सामने मुझे देखा न कीजिए।

नज़रे तो मेरी रूसवाओ बदनाम है मगर,
उनसे नहीं ये कहते नज़ारा न कीजिए।

जो जी में आये कीजिए अल्लाह के लिए,
यूॅ सब के सामने मुझे रूसवा न कीजिए।

मेरा दिल चुरा के कहते है वो ‘असद’
आया न कीजिए दिल में जाया न कीजिए।

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हिंदी बेवफ़ा शायरी, तेरे सुर्ख होंठों

हिंदी बेवफ़ा शायरी, तेरे सुर्ख होंठों…

Copy Bewafa Shayari

तेरे सुर्ख होंठों पर ये लाली अच्छी नहीं लगती
तेरे हांथों में ये प्याली अच्छी नहीं लगती
ए बेवफा मत बदल अब तू ज़मीर अपना
तेरे दर की सवाली अब अच्छी नहीं लगती

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हिंदी कश्ती शायरी, सागर की गहराई

हिंदी कश्ती शायरी, सागर की गहराई…

Copy Hindi Shayari

सागर की गहराई का अंदाज़ा कौन लगा पाया है
कितना गहरा है ये, भला कौन आज तक बता पाया है
किनारे तो मिले लगभग सबको ही अपनी ज़िन्दगी में साहिब
मगर अपनी ज़िन्दगी की किस्ती कश्ती को कौन कौन पार लगा पाया है

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