ADVERTISEMENT
इश्क़ शायरी इन हिंदी लैंग्वेज, न जाने ये दिल

इश्क़ शायरी इन हिंदी लैंग्वेज, न जाने ये दिल…

Copy Love Shayari

न जाने ये दिल उसका इन्तजार आज भी करता है,
उस बेवफा पर वैसा ही ऐतबार आज भी करता है,
बिछड़े हुए उनसे एक अरसा गुज़र गया,
पहले की तरह उनसे प्यार आज भी करता है।

 ~
इश्क़ शायरी, नज़र से मिली नज़र

इश्क़ शायरी, नज़र से मिली नज़र…

Copy Love Shayari

नज़र से मिली नज़र मुस्करा कर चले गये,
चन्द लम्हों में ही दिल लुटा कर चले गये,
दिल तड़पता रह गया उनके दीदार के लिए,
वो नकाब में चेहरा छुपा कर चले गये।

 ~
ADVERTISEMENT
इतना न सता हमको

इतना न सता हमको…

Copy Dard Shayari

इतना न सता हमको कही हम न बिखर जायें,
टूटा हुआ दिल ले कर जाये तो किधर जायें।

देखो तो सितम कितने करते है अपने ही,
सहते हुए इतने सितम कही हम न मर जायें।

ऐसे ही ग़मों के संग अब कैसे जियेगें हम,
बढ़ते हुए मेरे कदम यही पे न ठहर जायें।

 ~
जब टूटता है दिल वीरान होता है

जब टूटता है दिल वीरान होता है…

Copy Ghazal

प्यार करने का यही अंजाम होता है,
जब टूटता है दिल वीरान होता है।

दिल टूटने की सज़ा मिलती है दिल को,
फिर भी दिल ही बदनाम होता है।

लगती है चोट दिल पे तो ज़ख्म होते है,
क्या प्यार करने का यही इनाम होता है।

भटकती है निगाहें उनके दीदार के लिए,
न दिल में चैन सुकून न आराम होता है।

न जाने कौन सी घड़ी में दिल लगाया था,
वक्त पे देखो ये कैसा इल्जाम होता है।

 ~
न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है

न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है…

Copy Ghazal

न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है,
अधर में है न इस पार न उस पार रहता है।

जो दे गये है दर्द मुझे उम्र भर के लिए,
फिर भी उनके लौटने का इन्तजार रहता है।

घटायें छाती है बिन बरसे चली जाती है,
ये दिल रेगिस्तान की तरह बेज़ार रहता है।

ज़माने ने मुझे देखा मैने देखा ज़माने को,
अब कोई किसी का नही दिल तार-तार रहता है।

हम जानते है कि ज़माना बेदर्द है ‘असद’
मेरे दिल में सभी के लिए प्यार रहता है।

 ~
ADVERTISEMENT
मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे

मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे…

Copy Ghazal

मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे,
कि कोई भी मौसम इसे मज़ा न दे।

हमें तो सताया है अपनो ने ही,
कोई मेरे दिल को ये बता न दे।

इतना टूटा हॅू कि बिखर न जाऊ,
अब कोई मेरे दिल को सदा न दे।

मै तो जल रहा हॅू दिये की तरह,
कही बुझ न जाऊ और हवा न दे।

वो अपनी यादों के जख्म दे गये ‘असद’
कही भर न जाये ज़ख्म दवा न दे।

 ~
SPONSORED POSTS
loading...