हिंदी कश्ती शायरी, सागर की गहराई

हिंदी कश्ती शायरी, सागर की गहराई…

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सागर की गहराई का अंदाज़ा कौन लगा पाया है
कितना गहरा है ये, भला कौन आज तक बता पाया है
किनारे तो मिले लगभग सबको ही अपनी ज़िन्दगी में साहिब
मगर अपनी ज़िन्दगी की किस्ती कश्ती को कौन कौन पार लगा पाया है

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