तन्हाइयों से भरी

तन्हाइयों से भरी

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तन्हाइयों से भरी ज़िन्दगी है
और दिल मेरा वीरान है

चाहत भी क्या चाहत है उसकी
वो बेवफा बहुत महान है

मोहोब्बत लव्ज़ यूँ तो बफ दिखाती है
मगर ये भी बेवफाई से थोड़ी अनजान है

सब कुछ लुटा देते है लोग इस के कारण
इसलिए भी चाहत इसका नाम है

क्यों जलते हो तुम सब मुझ से
जिसका नाम है इस में वही तो बदनाम है

मिले अगर तन्हाई और गम तो अचरज न करना
के यही तो एक हसीन मोहोब्बत का अंजाम है

क्या हुआ जो उस ने तुमको ठुकरा दिया
और क्यों ले रखा तुमने अपने हाथों में जाम है

सुबह शाम, दिन रात बस मेहबूब को सोचना
बस एक यही इस इश्क़ का काम है

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