रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये

रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये…

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रोशन चिराग वो बुझा कर चले गये,
खुद को अन्धेरे में छुपा कर चले गये।

न जान सके उस बेवफा की फितरत को,
वो ढेरों ख्वाब मुझको दिखा कर चले गये।

खुद से भी ज्यादा यकीन था जिस पर,
वो मेरी जिन्दगी में अंधेरे सजा कर चले गये।

हम तो कब के टूट कर बिखर गये होते,
वो इंसान को पत्थर बना कर चले गये।

जिनके लिए बचायी थी दिल में थोड़ी सी जगह,
वो नफरतों के तीर दिल में चला कर चले गये।

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