न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है

न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है…

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न जाने ये दिल क्यों बेकरार रहता है,
अधर में है न इस पार न उस पार रहता है।

जो दे गये है दर्द मुझे उम्र भर के लिए,
फिर भी उनके लौटने का इन्तजार रहता है।

घटायें छाती है बिन बरसे चली जाती है,
ये दिल रेगिस्तान की तरह बेज़ार रहता है।

ज़माने ने मुझे देखा मैने देखा ज़माने को,
अब कोई किसी का नही दिल तार-तार रहता है।

हम जानते है कि ज़माना बेदर्द है ‘असद’
मेरे दिल में सभी के लिए प्यार रहता है।

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