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मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे

मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे…

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मेरे दिल को तू इतनी सज़ा न दे,
कि कोई भी मौसम इसे मज़ा न दे।

हमें तो सताया है अपनो ने ही,
कोई मेरे दिल को ये बता न दे।

इतना टूटा हॅू कि बिखर न जाऊ,
अब कोई मेरे दिल को सदा न दे।

मै तो जल रहा हॅू दिये की तरह,
कही बुझ न जाऊ और हवा न दे।

वो अपनी यादों के जख्म दे गये ‘असद’
कही भर न जाये ज़ख्म दवा न दे।

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