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इश्क़ ग़ज़ल, ये ताजमहल देखो हमें याद दिलाता है

इश्क़ ग़ज़ल, ये ताजमहल देखो हमें याद दिलाता है…

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ये ताजमहल देखो हमें याद दिलाता है
होती है क्या मुहब्बत ये सबको बताता है

लिखी है इसमे देखो दास्ताने मुहब्बत की
होती है कैसे देखो इबादत ये मुहब्बत की

ये बेजुवॉ है पर कहानी ये सुनाता है
होती है क्या मुहब्बत ये सबको बताता है

चाहा था उसने कितना कितनी मुहब्बत की थी
अपने प्यार की निषानी सारे जहॉ को दी थी

सच्ची मुहब्बत क्या है ये हमको सिखाता है
होती है क्या मुहब्बत ये सबको बताता है

है कितनी खूबसूरत संगमरमर की इमारत
इसमे की थी उसने मुमताज की इबादत

सदियों रहेगी याद अहसास कराता है
होती है क्या मुहब्बत ये सबको बताता है

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