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होंठ जैसे गुलाब के फूल हो

॥ होंठ जैसे गुलाब के फूल हो ॥

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होंठ जैसे गुलाब के फूल हो
बाल जैसे काली काली घटा

आँख जैसे गहरा सागर
पलकों पर जैसे हर मौसम फ़िदा

हर एक मुस्कान पर मरे कितने ही
उसकी है हर बात निराली और जुदा

नज़र उठे तो घटा छा जाये
नज़र गिरे तो हो जाये बारिश

और क्या कहू उसकी शान में आप सब से
बस छोटी सी ये एक मिसाल है उसके हसन की।

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