Hindi Ghazal, ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में

Hindi Ghazal, ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में…

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ना मुझे है खबर न मुझे है पता,
ढूँढता हूँ तुझे मैं तेरे शहर में।
मैं किस से कहूँ मैं कितना थका,
सभी अजनबी है तेरे शहर में।।

इस दिल को देखो कितना पागल है ये,
ज़ख्म कितने हुए है कितना घायल है ये।
फिर भी अनजान राहों में चलते हुए,
ये तुझको पुकारे तेरे शहर में।।

तू मेरे दिल की आवाज़ सुन ले ज़रा,
इस दिल में ये कैसा दर्द है भरा ।
मैं मुसाफिर हूँ मेरी मंज़िल है तू,
मुसाफिर-खाना नही है तेरे शहर में।।

दिल की फरियाद सुन ले ए जाने वफा,
अब तो आजा सामने तू कहाँ है छिपा ।
ये दिल हमारा है कितना उदास,
मैं कितना परेशां हूँ तेरे शहर में।।

मैं किस से बताऊँ कहाँ जा रहा हूँ,
इस दिल से तेरा नाम लिये जा रहा हूँ।
लोग हँसते है पैरों के ज़ख्म देख कर,
कोई हमदर्द नहीं है तेरे शहर में।।

मेरी हालत थी कैसी अब कैसी हुई है,
मुझसे जुदा है दिल तू सोयी हुई है।
जहा से गुजरता हूँ तेरी तलाश में,
लोग पागल समझते है तेरे शहर में।।

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