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हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें

हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें…

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हिजाब दिल से हटा दो तो ईद हो जायें,
मेरा नसीब जगा दो तो ईद हो जायें ।
नहीं है कोई जरूरत शराबो साकी की,
नज़र से अपनी पिला दो तो ईद हो जायें।

तमाम उम्र तो किसमत किस्मत ने दिये रंजो अलम,
खुशी का नगमा सुना दो तो ईद हो जाये।
हमें तो गम के अन्धेरों ने आ के घेरा है,
तुम एक दीप जला दो तो ईद हो जायें।

तुम्हारे दीदार में छुपी है खुशियाँ मेरी,
तुम जो नकाब उठा दो तो ईद हो जायें।
लिये दीदार की हसरत वो बैठा है ‘असद’
तुम जो चिलमन हटा दो तो ईद हो जायें।

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