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ग़ज़ल-ऐ-याद-ऐ-तड़प

ग़ज़ल-ऐ-याद-ऐ-तड़प

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उसकी याद जब आती है मुझ को
दिल मेरा ताड ताड हो जाता है

दिल में उठता है अजीब सा दर्द
और आंसुओं का अंबार हो जाता है

लगता है मेला मेरी आँखों में चेहरे का
और तेज़ तेज़ दिल का धरकना बार बार हो जाता है

हो जाती है फनाह मेरी शख्शियत उस पल लोगो
और मेरा दिल भी एकदम लाचार हो जाता है

उम्मीद अब तक है मेरे इस कम्बक्त दिल को
क्या करू ये दिल भी अब बेज़ार हो जाता है

कोई तो बता दो मुझे लोगो उस इंसानो के बारे में
कहा जाए वो इंसान जो इश्क़ में बेकार हो जाता है

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